अध्ययन सामग्री · Study Material
मूल ग्रन्थों में दशलक्षण धर्म
Dashlakshan in the Core Scriptures
छह प्रमुख ग्रन्थ एवं टीकाएँ जिनमें दशलक्षण धर्म का प्रकरण आता है — प्रकरण कहाँ है, उसमें क्या मिलता है और PDF के किस पृष्ठ पर। ‘Read Dashlakshan section’ से केवल वही अंश खुलता है; पूरा ग्रन्थ भी डाउनलोड कर सकते हैं।
Six key texts and commentaries that carry the Dashlakshan passage — where it is, what it contains and on which page. ‘Read Dashlakshan section’ opens just that passage; the whole book can be downloaded too.
एक दृष्टि में · At a glance
| ग्रन्थ · Granth | दशलक्षण प्रकरण · Passage | PDF पृष्ठ · Pages | |
|---|---|---|---|
| तत्त्वार्थसूत्रमूल ग्रन्थ · Core text | अध्याय 9, सूत्र 6 | 602–604 | Read → |
| बारस अणुवेक्खामूल ग्रन्थ · Core text | धर्मानुप्रेक्षा, गाथा 70–80 | 129–139 | Read → |
| कार्तिकेयानुप्रेक्षामूल ग्रन्थ · Core text | धर्मानुप्रेक्षा, गाथा 394–403 | 250–261 | Read → |
| पद्मनन्दि पंचविंशतिकामूल ग्रन्थ · Core text | धर्मोपदेशामृत, श्लोक 82–106 | 105–119 | Read → |
| रत्नकरण्ड श्रावकाचार (सदासुखदासजी)टीका · Commentary | षष्ठ भावना अधिकार — ‘धर्म के दश लक्षण’ | 331–358 | Read → |
| सर्वार्थसिद्धिटीका · Commentary | तत्त्वार्थसूत्र 9.6 की टीका (§ 797–798) | 350–351 | Read → |
1मूल ग्रन्थ · Core text
मोक्षशास्त्र (तत्त्वार्थसूत्र) — सटीक
Mokshashastra (Tattvartha Sutra) with commentary
आचार्य उमास्वामी · टीका: रामजी माणेकचन्द दोशी · हिन्दी अनुवाद: पं. परमेष्ठीदास न्यायतीर्थ
दशलक्षण प्रकरण · Passage
अध्याय 9, सूत्र 6
Chapter 9, sutra 6पृष्ठ · Pages
PDF पृष्ठ 602–604
छपी पुस्तक में पृष्ठ 552–554
“उत्तमक्षमामार्दवार्जवशौचसत्यसंयमतपस्त्यागाकिंचन्यब्रह्मचर्याणि धर्मः” — दशलक्षण धर्म का मूल सूत्र। इस सटीक संस्करण में सूत्र के साथ ‘उत्तम’ शब्द का अर्थ, धर्म का सच्चा स्वरूप और उसके विषय में होनेवाली भूलें भी समझाई गई हैं।
The root sutra of the ten dharmas. This edition also explains the word ‘uttam’, what dharma truly is, and the common mistakes about it.पढ़ने का सुझाव: पहले यही सूत्र पढ़ें — दशलक्षण धर्म का सूत्र-रूप परिचय।
2मूल ग्रन्थ · Core text
बारस अणुवेक्खा (द्वादशानुप्रेक्षा)
Baras Anuvekkha (Dvadashanupreksha)
आचार्य कुन्दकुन्द · सम्पादक एवं हिन्दी अनुवाद: डॉ. देवेन्द्रकुमार शास्त्री
दशलक्षण प्रकरण · Passage
धर्मानुप्रेक्षा, गाथा 70–80
Dharma-anupreksha, gathas 70–80पृष्ठ · Pages
PDF पृष्ठ 129–139
गाथा 70 में दसों धर्मों के नाम, और गाथा 71 से 80 तक एक-एक गाथा में उत्तम क्षमा से उत्तम ब्रह्मचर्य तक प्रत्येक धर्म का लक्षण — मूल प्राकृत गाथा, संस्कृत छाया, हिन्दी अर्थ एवं भावार्थ सहित।
Gatha 70 names the ten dharmas; gathas 71–80 give one dharma each — Prakrit original, Sanskrit rendering, Hindi meaning and explanation.पढ़ने का सुझाव: सबसे संक्षिप्त और स्पष्ट — प्रतिदिन उस दिन के धर्म की एक गाथा पढ़ें।
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3मूल ग्रन्थ · Core text
स्वामी कार्तिकेयानुप्रेक्षा
Swami Kartikeyanupreksha
स्वामी कार्तिकेय · भाषा टीका: पं. जयचन्दजी छाबड़ा
दशलक्षण प्रकरण · Passage
धर्मानुप्रेक्षा, गाथा 394–403
Dharma-anupreksha, gathas 394–403पृष्ठ · Pages
PDF पृष्ठ 250–261
छपी पुस्तक में पृष्ठ 216–227
मुनिधर्म के दस भेदों का क्रमिक निरूपण — गाथा 394 से 403 तक प्रत्येक धर्म की एक गाथा, पद्यानुवाद, अन्वयार्थ और भावार्थ सहित। उत्तम क्षमा में उपसर्ग सहकर क्षमा रखनेवाले मुनियों के उदाहरण भी।
The ten dharmas one by one (gathas 394–403) with verse translation, word meaning and explanation; examples of munis who kept forgiveness under affliction.पढ़ने का सुझाव: प्रत्येक गाथा का भावार्थ सरल हिन्दी में है — स्वाध्याय-सभा में पढ़ने योग्य।
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4मूल ग्रन्थ · Core text
पद्मनन्दि पंचविंशतिका
Padmanandi Panchavimshatika
आचार्य पद्मनन्दि · टीका: पं. गजाधरलाल न्यायतीर्थ
दशलक्षण प्रकरण · Passage
धर्मोपदेशामृत, श्लोक 82–106
Dharmopadeshamrit, shlokas 82–106पृष्ठ · Pages
PDF पृष्ठ 105–119
छपी पुस्तक में पृष्ठ 49–63
दशलक्षण धर्म का विस्तृत विवेचन — प्रत्येक धर्म पर दो-तीन श्लोक, हिन्दी पद्यानुवाद और अर्थ सहित; अन्त में श्लोक 106 में दस धर्मों को मोक्ष-महल पर चढ़ने की सीढ़ी के दस पायदान कहा गया है।
A detailed treatment: two or three shlokas on each dharma with Hindi verse and meaning; shloka 106 calls the ten dharmas the ten steps to the palace of liberation.पढ़ने का सुझाव: प्रवचन की तैयारी के लिए उत्तम — हर धर्म के कई पहलू एक साथ मिलते हैं।
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5टीका · Commentary
रत्नकरण्ड श्रावकाचार — पं. सदासुखदासजी की टीका
Ratnakaranda Shravakachar — Pt. Sadasukhdas's commentary
आचार्य समन्तभद्र · टीका: पं. सदासुखदासजी कासलीवाल
दशलक्षण प्रकरण · Passage
षष्ठ भावना अधिकार — ‘धर्म के दश लक्षण’
Chapter 6 (Bhavana) — ‘the ten marks of dharma’पृष्ठ · Pages
PDF पृष्ठ 331–358
छपी पुस्तक में पृष्ठ 288–315
मूल रत्नकरण्ड श्रावकाचार में अलग दशलक्षण प्रकरण नहीं है; सोलहकारण भावनाओं के बाद पं. सदासुखदासजी की टीका में ‘धर्म के दश लक्षण’ — उत्तम क्षमा से उत्तम ब्रह्मचर्य तक प्रत्येक धर्म का विस्तृत, सरल हिन्दी विवेचन।
Not in Samantabhadra's verses themselves: after the sixteen bhavanas, Pt. Sadasukhdas's commentary explains each of the ten dharmas at length in simple Hindi.पढ़ने का सुझाव: श्रावकों के लिए सबसे सरल भाषा — घर पर स्वाध्याय के लिए।
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6टीका · Commentary
सर्वार्थसिद्धि
Sarvarthasiddhi
आचार्य पूज्यपाद · सम्पादन-अनुवाद: सिद्धान्ताचार्य पं. फूलचन्द्र शास्त्री
दशलक्षण प्रकरण · Passage
तत्त्वार्थसूत्र 9.6 की टीका (§ 797–798)
Commentary on Tattvartha Sutra 9.6 (§ 797–798)पृष्ठ · Pages
PDF पृष्ठ 350–351
छपी पुस्तक में पृष्ठ 323–324
तत्त्वार्थसूत्र 9.6 की सबसे प्राचीन टीका — दस धर्म क्यों कहे गए, ‘उत्तम’ विशेषण का प्रयोजन, और क्षमा आदि प्रत्येक धर्म का शास्त्रीय लक्षण; संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद सहित।
The oldest commentary on sutra 9.6: why the ten dharmas are taught, the purpose of ‘uttam’, and the classical definition of each — Sanskrit with Hindi translation.पढ़ने का सुझाव: संक्षिप्त किन्तु प्रामाणिक शास्त्रीय लक्षण — विद्वानों एवं गहन अध्ययन के लिए।
‘PDF पृष्ठ’ इस वेबसाइट पर दी गई PDF फ़ाइल के पृष्ठ हैं; छपी पुस्तक के पृष्ठ-क्रमांक अलग हैं, वे भी दिए गए हैं। ‘Read Dashlakshan section’ केवल वह अंश (कुछ पृष्ठ) खोलता है — फ़ोन पर भी तुरन्त; उसमें प्रत्येक धर्म के बुकमार्क हैं।“PDF pages” are the pages of the file on this site; the printed book’s own page numbers are given too. “Read Dashlakshan section” opens only that passage — quick on a phone — with a bookmark for each dharma.
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