16 – 25 सितम्बर 2026
दस उत्तम धर्म
उत्तमक्षमामार्दवार्जवशौचसत्यसंयमतपस्त्यागाकिंचन्यब्रह्मचर्याणि धर्मः — तत्त्वार्थसूत्र 9.6
0116 सितम्बर 2026उत्तम क्षमाक्रोध के अभाव में आत्मा में प्रकट होने वाली शान्तिविरोधी भाव: क्रोध
0217 सितम्बर 2026उत्तम मार्दवमान के अभाव से प्रकट होने वाली कोमलता और विनयविरोधी भाव: मान
0318 सितम्बर 2026उत्तम आर्जवछल-कपट के अभाव से प्रकट होने वाली सरलताविरोधी भाव: माया
0419 सितम्बर 2026उत्तम शौचलोभ के अभाव से प्रकट होने वाली आन्तरिक पवित्रताविरोधी भाव: लोभ
0520 सितम्बर 2026उत्तम सत्यसत्स्वभावी आत्मा के आश्रय से प्रकट वीतराग परिणतिविरोधी भाव: असत्य
0621 सितम्बर 2026उत्तम संयमछह काय के जीवों की रक्षा और इन्द्रिय-मन का निग्रहविरोधी भाव: असंयम (इन्द्रिय और मन के विषयों में रति)
0722 सितम्बर 2026उत्तम तपइच्छा-निरोधपूर्वक आत्मलीनता द्वारा विकारों पर विजयविरोधी भाव: विषयों की इच्छा (अतप)
0823 सितम्बर 2026उत्तम त्यागनिज शुद्धात्मा के ग्रहणपूर्वक बाह्य-अभ्यन्तर परिग्रह से निवृत्तिविरोधी भाव: अत्याग (रागादिवश पर-वस्तु का ग्रहण)
0924 सितम्बर 2026उत्तम आकिंचन्यकिंचित्मात्र भी परपदार्थ मेरा नहीं — ऐसा जानना, माननाविरोधी भाव: परिग्रह
1025 सितम्बर 2026उत्तम ब्रह्मचर्यब्रह्म अर्थात् निज शुद्धात्मा में चरना, रमनाविरोधी भाव: अब्रह्म (कुशील)