
दिवस 06 · 21 सितम्बर 2026
उत्तम संयम धर्म
छह काय के जीवों की रक्षा और इन्द्रिय-मन का निग्रह
परिचय
संयमन को संयम कहते हैं — उपयोग को परपदार्थों से समेटकर अपने में सीमित करना। व्रतों और समितियों का पालन, कषायों का निग्रह तथा पाँच इन्द्रियों के विषयों को जीतना भी संयम है। इसके दो भेद हैं — प्राणिसंयम और इन्द्रियसंयम।
विरोधी भाव: असंयम (इन्द्रिय और मन के विषयों में रति)
आज की साधना
- दशलक्षण पूजन के उत्तम संयम अंश का अर्थ सहित पाठ
- जल, वनस्पति आदि का विवेकपूर्ण और सीमित उपयोग
- पाँच इन्द्रियों के किसी एक विषय का नियमपूर्वक त्याग
उत्तम संयम
अश्व तुल्य चञ्चल मनेन्द्रिय पै हो सवार,सावधान होकै मत छोड़ना लगाम को।नातर ये पाप गर्त माहिं तोहि डारि जाहि,धर्म खेत खाय जाय मूल से तमाम को॥छोड़िकै अभक्षण को छहों काय रक्षा करि,शिक्षण ले ग्रन्थन से जपो आत्म राम को।बारै व्रत पालि, रत्न संयम संभालि,विषै चोर को निकालि, चलौ निश्चै शिवधाम को॥
यह anti–virus हमें नुकसान पहुँचाने वाले किसी भी अन्य हानिकारक sites (इंद्रिय विषय–भोग) पर जाने से रोकता है और सावधान करता है।
आज की पूजन
दशलक्षण धर्म पूजन — कविवर पं. द्यानतरायजी
विधान एवं अर्घ्य
श्री दशलक्षण धर्म विधान — कविवर पं. राजमलजी पवैया
भक्ति एवं लय
पूजन-विधान के छन्द किस धुन में गाएँ, और भजन संग्रह
अध्ययन
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आज के चित्र
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उत्तम संयम — 5 प्रश्नों की दैनिक Quiz
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