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दशलक्षण महापर्व 2026सम्यग्ज्ञान प्रचार-प्रसार ट्रस्ट

दिवस 04 · 19 सितम्बर 2026

उत्तम शौच धर्म

लोभ के अभाव से प्रकट होने वाली आन्तरिक पवित्रता

परिचय

'शुचेर्भावः शौचम्' — शुचिता अर्थात् पवित्रता का नाम शौच है। शौचधर्म का विरोधी लोभ कषाय है, जिसे 'पाप का बाप' कहा गया है। पूजन के अनुसार नदियों और समुद्र में स्नान से नहीं, संतोष से ही वास्तविक शुचिता आती है।

विरोधी भाव: लोभ

आज की साधना

  • दशलक्षण पूजन के उत्तम शौच अंश का अर्थ सहित पाठ
  • प्राप्त में संतोष तथा किसी एक वस्तु के संग्रह की सीमा का संकल्प
  • लोभ कषाय के स्वरूप और दुष्परिणाम का स्वाध्याय

उत्तम शौच धर्म

परम पवित्र आत्मा जानो।लोभ पाप का बाप बखानो।।लोभी का चित महा मलीना।निर्लोभी जीवन नित जीना।।दुर्गति में गिरे सुभौम लोभ से।बाहुबली शिव गए शौच से।।
समकित शास्त्री

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आज की पूजन

दशलक्षण धर्म पूजन — कविवर पं. द्यानतरायजी

विधान एवं अर्घ्य

श्री दशलक्षण धर्म विधान — कविवर पं. राजमलजी पवैया

भक्ति एवं लय

पूजन-विधान के छन्द किस धुन में गाएँ, और भजन संग्रह

अध्ययन

आज के धर्म को समझने के लिए

आज के चित्र

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आज आपने क्या सीखा?

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