
दिवस 03 · 18 सितम्बर 2026, शुक्रवार · Day 3
तिथि: भाद्रपद शुक्ल सप्तमीBhadrapada Shukla Saptami
उत्तम आर्जव धर्म
Uttam Arjav — Supreme Straightforwardness
छल-कपट के अभाव से प्रकट होने वाली सरलता
परिचय · Introduction
'ऋजोर्भावः आर्जवम्' — ऋजुता अर्थात् सरलता का नाम आर्जव है। माया कषाय के कारण जीव सोचता कुछ है, बोलता कुछ है और करता कुछ है; उसके मन, वचन और काय में एकरूपता नहीं रहती। पूजन का सूत्र है — 'मन में होय सो वचन उचरिये, वचन होय सो तन सौं करिये'।
विरोधी भाव · Opposes: माया
आज की साधना · Today's practice
- दशलक्षण पूजन के उत्तम आर्जव अंश का अर्थ सहित पाठ
- जैसा सोचें वैसा कहें, जैसा कहें वैसा करें — इसका अभ्यास
- दिनभर के व्यवहार में छल-कपट का आत्म-निरीक्षण
आज की पूजन
Today's pujan
दशलक्षण धर्म पूजन — कविवर पं. द्यानतरायजी
पूजन — अर्थ सहित · With meaning
दशलक्षण धर्म पूजन — सरल अर्थ सहित
कविवर पं. द्यानतरायजी
PDF13 पृष्ठ3.6 MB
Openविधान एवं अर्घ्य
Vidhan and arghya
श्री दशलक्षण धर्म विधान — कविवर पं. राजमलजी पवैया
आज की धर्मांग पूजा · Today's vidhan puja
उत्तम आर्जव धर्मांग पूजा
कविवर पं. राजमलजी पवैया
PDF34 पृष्ठ4.0 MB
Openसुनें और साथ में पूजन करें
Listen and join in
स्वर · Voices: पं. सुनीलजी शास्त्री एवं सुश्री श्वेतल जैन, राजकोट — सर्वोदय अहिंसा
आज की धर्मांग पूजा · Today's vidhan puja
उत्तम आर्जव धर्म पूजन
कविवर पं. राजमलजी पवैया
दशलक्षण धर्म पूजन · Daily pujan
दशलक्षण धर्म पूजन
कविवर पं. द्यानतरायजी
आज का अर्घ्य — पूजन · Today's arghya (pujan)
उत्तम आर्जव धर्म अर्घ्य
आज का अर्घ्य — विधान · Today's arghya (vidhan)
उत्तम आर्जव धर्म अर्घ्य — विधान
कविवर पं. राजमलजी पवैया
उत्तम आर्जव धर्म पर प्रवचन
Today's pravachan
विद्वानों के प्रवचन — वर्ष एवं स्थान के अनुसार
बाल ब्र. पं. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’Baal Br. Pt. Ravindra Ji ‘Aatman’ · 2 talks
डॉ. हुकमचन्द भारिल्लDr. Hukamchand Bharill · 1 talk
बाल ब्र. पं. सुमतप्रकाशजीBaal Br. Pt. Sumat Prakash Ji · 6 talks
डॉ. संजीव गोधाDr. Sanjeev Godha · 1 talk
भक्ति एवं लय
Bhakti and tunes
पूजन-विधान के छन्द किस धुन में गाएँ, और भजन संग्रह
काव्य
Poems
उत्तम आर्जव धर्म पर कविताएँ — पढ़ें, गाएँ और बच्चों को सिखाएँ
भव्य प्रमोदकवित्त
उत्तम आर्जव
कपट कटार से गरीबन का गला काटि,पाप की कमाई कहौ कै जनम खायेगा।धोखे छल छिद्र ब्लैक मारकीट से घसीट,लाख कोड़ि जोड़– जड़ साथ न ले जाएगा।हाकिम आ जाय खूब रिश्वत हूँ खाय देय,जेल में पठाय उम्र सारी दु:ख पाएगा।तातें छल छिद्र छोड़ि कपट कटार तोड़ि,आर्जव से प्रीति जोड़ि धर्मी कहलायगा।
समकित शास्त्री
उत्तम आर्जव धर्म
आर्जव आत्म स्वभाव है।मायाचारी विभाव है।।छल–कपटी तो डरता–छिपता।सरल स्वभावी निर्भय रहता।।माया से मृदुमति पशु हुए।आर्जवी वादिराज प्रभु हुए।।
यह anti–virus हमारे system के स्वभाव से विपरीत होने वाले कार्य को रोकता है और स्वभाव के अनुसार कार्य कराता है।
विराग शास्त्रीबच्चों के लिए · for children
उत्तम आर्जव धर्म
आर्जव अर्थ सरलता जान,सच्चे जैनी की पहचान॥मायाचारी कभी न करना,प्रेम भाव से मिल-जुल रहना॥सरल भाव है शुद्धातम,जानो बनना परमातम॥कपट भाव दुखदाई मान,सरल भाव से हो सन्मान॥त्याग कपटता बनो महान,पा जाओगे सुख की खान॥
कविताएँ चित्रों से टाइप की गई हैं; कोई त्रुटि दिखे तो बताएँ। Typed from the original cards — please tell us if you spot a mistake.
अध्ययन
Study
आज के धर्म को समझने के लिए
आज के चित्र
Today's images
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आज आपने क्या सीखा? · What did you learn today?
उत्तम आर्जव — आज की प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता
Today's quiz competition



