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दशलक्षण महापर्व 2026सम्यग्ज्ञान प्रचार-प्रसार ट्रस्ट

दिवस 03 · 18 सितम्बर 2026

उत्तम आर्जव धर्म

छल-कपट के अभाव से प्रकट होने वाली सरलता

परिचय

'ऋजोर्भावः आर्जवम्' — ऋजुता अर्थात् सरलता का नाम आर्जव है। माया कषाय के कारण जीव सोचता कुछ है, बोलता कुछ है और करता कुछ है; उसके मन, वचन और काय में एकरूपता नहीं रहती। पूजन का सूत्र है — 'मन में होय सो वचन उचरिये, वचन होय सो तन सौं करिये'।

विरोधी भाव: माया

आज की साधना

  • दशलक्षण पूजन के उत्तम आर्जव अंश का अर्थ सहित पाठ
  • जैसा सोचें वैसा कहें, जैसा कहें वैसा करें — इसका अभ्यास
  • दिनभर के व्यवहार में छल-कपट का आत्म-निरीक्षण

उत्तम आर्जव धर्म

आर्जव आत्म स्वभाव है।मायाचारी विभाव है।।छल–कपटी तो डरता–छिपता।सरल स्वभावी निर्भय रहता।।माया से मृदुमति पशु हुए।आर्जवी वादिराज प्रभु हुए।।
समकित शास्त्री

यह anti–virus हमारे system के स्वभाव से विपरीत होने वाले कार्य को रोकता है और स्वभाव के अनुसार कार्य कराता है।

आज की पूजन

दशलक्षण धर्म पूजन — कविवर पं. द्यानतरायजी

विधान एवं अर्घ्य

श्री दशलक्षण धर्म विधान — कविवर पं. राजमलजी पवैया

भक्ति एवं लय

पूजन-विधान के छन्द किस धुन में गाएँ, और भजन संग्रह

अध्ययन

आज के धर्म को समझने के लिए

आज के चित्र

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आज आपने क्या सीखा?

उत्तम आर्जव — 5 प्रश्नों की दैनिक Quiz

आज के धर्म पर 5 सरल प्रश्न — उत्तर के साथ व्याख्या भी।

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