
दिवस 10 · 25 सितम्बर 2026, शुक्रवार · Day 10
तिथि: भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशीअनंत चतुर्दशीBhadrapada Shukla Chaturdashi · Anant Chaturdashi
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म
Uttam Brahmacharya — Supreme Celibacy (dwelling in the Self)
ब्रह्म अर्थात् निज शुद्धात्मा में चरना, रमना
परिचय · Introduction
ब्रह्म अर्थात् निज शुद्धात्मा में चरना, रमना ही ब्रह्मचर्य है; आत्मलीनतापूर्वक पंचेन्द्रिय के विषयों का त्याग वास्तविक ब्रह्मचर्य है। व्यवहार में शील की नौ बाड़ों से रक्षा का उपदेश है। आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य को एक सिक्के के दो पहलू कहा गया है।
विरोधी भाव · Opposes: अब्रह्म (कुशील)
आज की साधना · Today's practice
- उत्तम ब्रह्मचर्य अंश और समुच्चय जयमाला का अर्थ सहित पाठ
- दृष्टि, वचन और विचार में शील की मर्यादा का पालन
- आगामी क्षमावाणी हेतु मन से वैर-भाव छोड़ने का चिंतन
आज की पूजन
Today's pujan
दशलक्षण धर्म पूजन — कविवर पं. द्यानतरायजी
पूजन — अर्थ सहित · With meaning
दशलक्षण धर्म पूजन — सरल अर्थ सहित
कविवर पं. द्यानतरायजी
PDF13 पृष्ठ3.6 MB
Openविधान एवं अर्घ्य
Vidhan and arghya
श्री दशलक्षण धर्म विधान — कविवर पं. राजमलजी पवैया
आज की धर्मांग पूजा · Today's vidhan puja
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्मांग पूजा
कविवर पं. राजमलजी पवैया
PDF43 पृष्ठ5.2 MB
Openसुनें और साथ में पूजन करें
Listen and join in
स्वर · Voices: पं. सुनीलजी शास्त्री एवं सुश्री श्वेतल जैन, राजकोट — सर्वोदय अहिंसा
आज की धर्मांग पूजा · Today's vidhan puja
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पूजन
कविवर पं. राजमलजी पवैया
दशलक्षण धर्म पूजन · Daily pujan
दशलक्षण धर्म पूजन
कविवर पं. द्यानतरायजी
आज का अर्घ्य — पूजन · Today's arghya (pujan)
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म अर्घ्य
आज का अर्घ्य — विधान · Today's arghya (vidhan)
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म अर्घ्य — विधान
कविवर पं. राजमलजी पवैया
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर प्रवचन
Today's pravachan
विद्वानों के प्रवचन — वर्ष एवं स्थान के अनुसार
बाल ब्र. पं. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’Baal Br. Pt. Ravindra Ji ‘Aatman’ · 2 talks
डॉ. हुकमचन्द भारिल्लDr. Hukamchand Bharill · 1 talk
बाल ब्र. पं. सुमतप्रकाशजीBaal Br. Pt. Sumat Prakash Ji · 5 talks
डॉ. संजीव गोधाDr. Sanjeev Godha · 1 talk
भक्ति एवं लय
Bhakti and tunes
पूजन-विधान के छन्द किस धुन में गाएँ, और भजन संग्रह
काव्य
Poems
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर कविताएँ — पढ़ें, गाएँ और बच्चों को सिखाएँ
भव्य प्रमोदकवित्त
उत्तम ब्रह्मचर्य
ब्रह्म आतमा में ब्रह्मचारी सदा काल रमैं,चित्त में न होय कभी कामदेव वासना।अप्सरा समान खड़ी देख दिव्य नारियों को,किञ्चत् हू आवै जिनके विकार पास ना॥रात भर सुदर्शन से रानी ने रारि करी,निर्विकार सेठ किया ब्रह्मचर्य नास ना।ब्रह्मचारियों पै पड़ें संकट अनेक आन,धैर्य से सहन करें होत हैं हतास ना॥
समकित शास्त्री
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म
ब्रह्म रूप आतम है अपना।शील विरुद्ध नहीं आचरना।।इन्द्रिय विषयों से प्रीति छोड़ो।विपरीत शील से नाता तोड़ो।।कुशील पाप से दुख नहीं पाओ।सुदर्शन, अनंतमती बन जाओ।।
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विराग शास्त्रीबच्चों के लिए · for children
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म
श्री मुनिवर से पूछें हम सब ब्रह्मचर्य क्या होता है?ब्रह्मचर्य से क्या मिलता है, कैसे पाला जाता है?श्री मुनिवर समझाते हैं, शील स्वयं भी ध्याते हैं।सदा शील गुण धारना, और कुशील भी त्यागना।गंदी बातें गंदे दोस्त, गंदी सोच भी छोड़ना।टीवी, पिक्चर खोटे भाव, कभी न नाता जोड़ना।अपना आतम ही है ब्रह्म, इसमें रमना कहे चरण।ब्रह्मचर्य शिवधाम करें, भवसागर का अंत करें॥
कविताएँ चित्रों से टाइप की गई हैं; कोई त्रुटि दिखे तो बताएँ। Typed from the original cards — please tell us if you spot a mistake.
अध्ययन
Study
आज के धर्म को समझने के लिए
आज के चित्र
Today's images
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आज आपने क्या सीखा? · What did you learn today?
उत्तम ब्रह्मचर्य — आज की प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता
Today's quiz competition



