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दिवस 10 · 25 सितम्बर 2026

उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म

ब्रह्म अर्थात् निज शुद्धात्मा में चरना, रमना

परिचय

ब्रह्म अर्थात् निज शुद्धात्मा में चरना, रमना ही ब्रह्मचर्य है; आत्मलीनतापूर्वक पंचेन्द्रिय के विषयों का त्याग वास्तविक ब्रह्मचर्य है। व्यवहार में शील की नौ बाड़ों से रक्षा का उपदेश है। आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य को एक सिक्के के दो पहलू कहा गया है।

विरोधी भाव: अब्रह्म (कुशील)

आज की साधना

  • उत्तम ब्रह्मचर्य अंश और समुच्चय जयमाला का अर्थ सहित पाठ
  • दृष्टि, वचन और विचार में शील की मर्यादा का पालन
  • आगामी क्षमावाणी हेतु मन से वैर-भाव छोड़ने का चिंतन

उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म

ब्रह्म रूप आतम है अपना।शील विरुद्ध नहीं आचरना।।इन्द्रिय विषयों से प्रीति छोड़ो।विपरीत शील से नाता तोड़ो।।कुशील पाप से दुख नहीं पाओ।सुदर्शन, अनंतमती बन जाओ।।
समकित शास्त्री

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आज की पूजन

दशलक्षण धर्म पूजन — कविवर पं. द्यानतरायजी

विधान एवं अर्घ्य

श्री दशलक्षण धर्म विधान — कविवर पं. राजमलजी पवैया

भक्ति एवं लय

पूजन-विधान के छन्द किस धुन में गाएँ, और भजन संग्रह

अध्ययन

आज के धर्म को समझने के लिए

आज के चित्र

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आज आपने क्या सीखा?

उत्तम ब्रह्मचर्य — 5 प्रश्नों की दैनिक Quiz

आज के धर्म पर 5 सरल प्रश्न — उत्तर के साथ व्याख्या भी।

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