
दिवस 09 · 24 सितम्बर 2026, गुरुवार · Day 9
तिथि: भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशीBhadrapada Shukla Trayodashi
उत्तम आकिंचन्य धर्म
Uttam Akinchanya — Supreme Non-possessiveness
किंचित्मात्र भी परपदार्थ मेरा नहीं — ऐसा जानना, मानना
परिचय · Introduction
आत्मा को छोड़कर किंचित्मात्र भी परपदार्थ तथा पर के लक्ष्य से होने वाले मोह-राग-द्वेष आत्मा के नहीं हैं — ऐसा जानना, मानना और उनसे विरत होना उत्तम आकिंचन्य है। परिग्रह के चौबीस भेद कहे गए हैं — चौदह आभ्यन्तर और दस बाह्य।
विरोधी भाव · Opposes: परिग्रह
आज की साधना · Today's practice
- दशलक्षण पूजन के उत्तम आकिंचन्य अंश का अर्थ सहित पाठ
- अनावश्यक वस्तुओं के संग्रह की सीमा और क्रमशः कमी
- 'आत्मा से भिन्न कुछ भी मेरा नहीं' — इस भाव का चिंतन
आज की पूजन
Today's pujan
दशलक्षण धर्म पूजन — कविवर पं. द्यानतरायजी
पूजन — अर्थ सहित · With meaning
दशलक्षण धर्म पूजन — सरल अर्थ सहित
कविवर पं. द्यानतरायजी
PDF13 पृष्ठ3.6 MB
Openविधान एवं अर्घ्य
Vidhan and arghya
श्री दशलक्षण धर्म विधान — कविवर पं. राजमलजी पवैया
आज की धर्मांग पूजा · Today's vidhan puja
उत्तम आकिंचन्य धर्मांग पूजा
कविवर पं. राजमलजी पवैया
PDF35 पृष्ठ5.9 MB
Openसुनें और साथ में पूजन करें
Listen and join in
स्वर · Voices: पं. सुनीलजी शास्त्री एवं सुश्री श्वेतल जैन, राजकोट — सर्वोदय अहिंसा
आज की धर्मांग पूजा · Today's vidhan puja
उत्तम आकिंचन्य धर्म पूजन
कविवर पं. राजमलजी पवैया
दशलक्षण धर्म पूजन · Daily pujan
दशलक्षण धर्म पूजन
कविवर पं. द्यानतरायजी
आज का अर्घ्य — पूजन · Today's arghya (pujan)
उत्तम आकिंचन्य धर्म अर्घ्य
आज का अर्घ्य — विधान · Today's arghya (vidhan)
उत्तम आकिंचन्य धर्म अर्घ्य — विधान
कविवर पं. राजमलजी पवैया
उत्तम आकिंचन्य धर्म पर प्रवचन
Today's pravachan
विद्वानों के प्रवचन — वर्ष एवं स्थान के अनुसार
बाल ब्र. पं. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’Baal Br. Pt. Ravindra Ji ‘Aatman’ · 2 talks
डॉ. हुकमचन्द भारिल्लDr. Hukamchand Bharill · 1 talk
बाल ब्र. पं. सुमतप्रकाशजीBaal Br. Pt. Sumat Prakash Ji · 6 talks
डॉ. संजीव गोधाDr. Sanjeev Godha · 1 talk
भक्ति एवं लय
Bhakti and tunes
पूजन-विधान के छन्द किस धुन में गाएँ, और भजन संग्रह
काव्य
Poems
उत्तम आकिंचन्य धर्म पर कविताएँ — पढ़ें, गाएँ और बच्चों को सिखाएँ
भव्य प्रमोदकवित्त
उत्तम आकिंचन्य
अम्बर को छोड़ के निरम्बर मुनीश हुये,सम्वर को धार के दिगम्बर कहाये हैं।होय पर्म हंस कर्म वंश को मिटाय रहे,आतमीक धर्म में निशंक होय धाये हैं।चार बीस ग्रन्थ त्याग लगे ज्ञान मन्थन में,वे ही निरग्रन्थ संत ग्रन्थन में गाये हैं।आस फाँस छेदत जे कर्म शैल भेदत जे,आकिंचन धारी मुनि सभी को सुहाये हैं।
समकित शास्त्री
उत्तम आकिंचन्य धर्म
पर वस्तु त्याग आकिंचन जानो।तृष्णा भाव न मन में आनो।।परिग्रह भाव महा दुःखकारी।संसार बढ़ावे बोझा भारी।।श्मश्रु नवनीत सम सपने छोड़ो।शांति–कुन्थु–अर सम मुख मोड़ो।।
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विराग शास्त्रीबच्चों के लिए · for children
उत्तम आकिंचन्य धर्म
कुछ नहीं बाहर में मेरा है, सुनलो जी।आकिंचन्य धर्म बताता जी।मैं हूँ अनंत गुणों की खान,हूँ स्वतंत्र निश्चल निष्काम।अपना गौरव गरिमा पा लो जी।नहीं बनूँ मैं पर का दास,मैं पूरा हूँ हो विश्वास।सिद्ध समान स्वयं को ध्या लो जी।
कविताएँ चित्रों से टाइप की गई हैं; कोई त्रुटि दिखे तो बताएँ। Typed from the original cards — please tell us if you spot a mistake.
अध्ययन
Study
आज के धर्म को समझने के लिए
आज के चित्र
Today's images
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आज आपने क्या सीखा? · What did you learn today?
उत्तम आकिंचन्य — आज की प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता
Today's quiz competition



