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दशलक्षण महापर्व 2026सम्यग्ज्ञान प्रचार-प्रसार ट्रस्ट

दिवस 09 · 24 सितम्बर 2026

उत्तम आकिंचन्य धर्म

किंचित्मात्र भी परपदार्थ मेरा नहीं — ऐसा जानना, मानना

परिचय

आत्मा को छोड़कर किंचित्मात्र भी परपदार्थ तथा पर के लक्ष्य से होने वाले मोह-राग-द्वेष आत्मा के नहीं हैं — ऐसा जानना, मानना और उनसे विरत होना उत्तम आकिंचन्य है। परिग्रह के चौबीस भेद कहे गए हैं — चौदह आभ्यन्तर और दस बाह्य।

विरोधी भाव: परिग्रह

आज की साधना

  • दशलक्षण पूजन के उत्तम आकिंचन्य अंश का अर्थ सहित पाठ
  • अनावश्यक वस्तुओं के संग्रह की सीमा और क्रमशः कमी
  • 'आत्मा से भिन्न कुछ भी मेरा नहीं' — इस भाव का चिंतन

उत्तम आकिंचन्य धर्म

पर वस्तु त्याग आकिंचन जानो।तृष्णा भाव न मन में आनो।।परिग्रह भाव महा दुःखकारी।संसार बढ़ावे बोझा भारी।।श्मश्रु नवनीत सम सपने छोड़ो।शांति–कुन्थु–अर सम मुख मोड़ो।।
समकित शास्त्री

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आज की पूजन

दशलक्षण धर्म पूजन — कविवर पं. द्यानतरायजी

विधान एवं अर्घ्य

श्री दशलक्षण धर्म विधान — कविवर पं. राजमलजी पवैया

भक्ति एवं लय

पूजन-विधान के छन्द किस धुन में गाएँ, और भजन संग्रह

अध्ययन

आज के धर्म को समझने के लिए

आज के चित्र

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आज आपने क्या सीखा?

उत्तम आकिंचन्य — 5 प्रश्नों की दैनिक Quiz

आज के धर्म पर 5 सरल प्रश्न — उत्तर के साथ व्याख्या भी।

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