
दिवस 02 · 17 सितम्बर 2026
उत्तम मार्दव धर्म
मान के अभाव से प्रकट होने वाली कोमलता और विनय
परिचय
'मृदोर्भावः मार्दवम्' — मृदुता अर्थात् कोमलता का नाम मार्दव है। मान कषाय के कारण जीव अपने को बड़ा और दूसरों को छोटा मानने लगता है तथा उसमें विनय का अभाव हो जाता है। कुल, जाति, रूप, ज्ञान, धन, बल, तप और प्रभुता — ये मान के आठ भेद कहे गए हैं।
विरोधी भाव: मान
आज की साधना
- दशलक्षण पूजन के उत्तम मार्दव अंश का अर्थ सहित पाठ
- गुरुजनों और गुणीजनों के प्रति विनय का विशेष ध्यान
- मान के आठ भेदों के आधार पर अपने भीतर का आत्म-निरीक्षण
उत्तम मार्दव धर्म
मार्दव मेरा धर्म है।मानी को न शर्म है।।मान कषाय ना करना है।कोमलता को धरना है।।मान से रावण नरक गया।मार्दवी भरत को मोक्ष हुआ।।
मार्दव का anti–virus हमें अभिमान नामक खतरनाक virus से बचाता है।
आज की पूजन
दशलक्षण धर्म पूजन — कविवर पं. द्यानतरायजी
विधान एवं अर्घ्य
श्री दशलक्षण धर्म विधान — कविवर पं. राजमलजी पवैया
भक्ति एवं लय
पूजन-विधान के छन्द किस धुन में गाएँ, और भजन संग्रह
अध्ययन
आज के धर्म को समझने के लिए
आज के चित्र
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आज आपने क्या सीखा?
उत्तम मार्दव — 5 प्रश्नों की दैनिक Quiz
आज के धर्म पर 5 सरल प्रश्न — उत्तर के साथ व्याख्या भी।
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