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दशलक्षण महापर्व 2026सम्यग्ज्ञान प्रचार-प्रसार ट्रस्ट

दिवस 07 · 22 सितम्बर 2026

उत्तम तप धर्म

इच्छा-निरोधपूर्वक आत्मलीनता द्वारा विकारों पर विजय

परिचय

समस्त रागादि भावों की इच्छा के त्यागपूर्वक आत्मलीनता द्वारा विकारों पर विजय प्राप्त करना तप है; धवला में इच्छा-निरोध को तप कहा है। तप बारह प्रकार का है — छह बहिरंग और छह अंतरंग। सम्यग्दर्शन के बिना किया गया तप बालतप कहा गया है।

विरोधी भाव: विषयों की इच्छा (अतप)

आज की साधना

  • दशलक्षण पूजन के उत्तम तप अंश का अर्थ सहित पाठ
  • शक्ति के अनुसार उपवास, एकाशन अथवा अल्पाहार
  • स्वाध्याय और ध्यान — अंतरंग तप — के लिए नियत समय

उत्तम तप धर्म

आत्मलीनता ही तप जानो।सब पर वस्तु रहित निज मानो।।विषयों की इच्छा नहीं करना।निर्वांछक हो तप आचरना।।नर भव की महिमा पहचानो।सुकुमाल महामुनि सम तप ठानो।।
समकित शास्त्री

तप का anti–virus हमें विषय भोगों के virus से बचाता है।

आज की पूजन

दशलक्षण धर्म पूजन — कविवर पं. द्यानतरायजी

विधान एवं अर्घ्य

श्री दशलक्षण धर्म विधान — कविवर पं. राजमलजी पवैया

भक्ति एवं लय

पूजन-विधान के छन्द किस धुन में गाएँ, और भजन संग्रह

अध्ययन

आज के धर्म को समझने के लिए

आज के चित्र

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आज आपने क्या सीखा?

उत्तम तप — 5 प्रश्नों की दैनिक Quiz

आज के धर्म पर 5 सरल प्रश्न — उत्तर के साथ व्याख्या भी।

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