लोकापवाद के कारण श्रीराम द्वारा सीता के परित्याग और तत्पश्चात उनके हृदय में उठे पश्चाताप को प्रस्तुत करता मंचन योग्य नाटक। श्रीराम, लक्ष्मण, सेवक व सेनापति कृतांतवक्र आदि पात्रों के संवाद, मंच निर्देश व दृश्य संकेतों सहित एक आधुनिक मंचन-स्क्रिप्ट। जैन रामकथा (पद्मपुराण) परंपरा पर आधारित।
A ready-to-stage drama depicting Shri Ram’s abandonment of Sita under public censure and the deep remorse (paschatap) that follows. A modern staging script with dialogues of Ram, Lakshman, the servant and army-chief Kritantvakra, along with stage directions and scene cues — rooted in the Jain Ramkatha (Padmapuran) tradition.
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पूरा नाटक / Full Script
नाटक
राम का पश्चाताप
लेखक –नायक अंबर शास्त्री बतेह
जैन नाटक प्रतियोगित आदि में सहायता हेतु और सुझाव आदि के लिए
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Part 1
सूत्रधार
जय जिनेंद्र
श्री राम का चरित्र जैन और जैनेतर साहित्य में बड़े आदर और सम्मान के साथ प्रस्तुत किया गया है ।श्री राम पूरे भारतवर्ष में मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में प्रसिद्ध रहे है ।चाहे वो पुत्र की मर्यादा हो, पति की मर्यादा हो ,राजा की मर्यादा हो ।सभी में श्री राम ने पुरुषोत्तम चरित्र को ही जिया है ।हम ज्ञानोदय दिगंबर जैन सिद्धांत महाविद्यालय के विद्यार्थी उन्ही आदर्श पुरुष के जीवन चरित्र का एक प्रसंग प्रस्तुत कर रहे हैं ।जिसमें लोकापवाद के कारण महारानी सीता का उनके द्वारा त्याग कर दिया जाता है । हमें विश्वास है कि त्याग और वैराग्य की मूर्ति श्री राम का चरित्र हमारे मोक्ष मार्ग में सहायक होगा।
(मंगलाचरण __प्रथम कर अहींती का ध्यान)
(रामचन्द्र entry music ♪♪♪♪)
Fade out
Part 2
दृश्य -2
(सनसनी खेज पार्थ संगीत) full scene में
10 – 15 sec के बाद डायलॉग स्टार्ट
(धोबी - 1) - अरे पराए घर से आई हुई स्त्री को कोई अपने घर में कैसे रख सकता हैं।
सभी धोबी - (साथ में ) हां हां कैसे रख सकता है ।
(3सेकेंड)
(आगम) - ना जाने कैसे कैसे लोग रह रहे है इस दुनिया में कोई लोक मायार्दा ही नहीं रही है।
(5सेकेंड)
(काशी) - अरे रुक ,रुक जा वहां कहा चली आ रही है ।
(अर्पित ) - क्यों ,क्या हुआ
(काशी) - तुझे पता नहीं लोग तेरे बारे में क्या क्या बोल रहे है ,
(1 सेकेंड)
सही ही तो कह रहे है लोग न जाने कहां कहां रह कर आई होगी जा तू निकल जा मेरे घर से।
(अर्पित)- हूं ,अरे मैं तीन चार दिन घर से बाहर क्या रह आई आप ने तो मुझे घर से बाहर ही निकाल दिया और वो अवध रानी 6 महीने लंका में रही महाराज ने उनसे तो कुछ नहीं कहा।
सभी साथ में - हां हां सही बात है ।
(संभव) - अरे वो तो राजा हैं अब उनसे कोई क्या कहे
(शैलेंद्र) - राजा हैं तो क्या हुआ राजा को तो न्यायवादी होना चाहिए।
(सभी) हा हा होना चाहिए _3
दृश्य - 3
(राजदरबार music) soft
राम - मंत्रीवर प्रजा में सब कुशल मंगल तो है ना ?
मंत्री - महाराज आपके आगमन से प्रजाजन बहुत प्रसन्न है धन-धान्य और खनिज के भंडार से देश समृद्ध है आंतरिक और बाह्य शत्रुओं से कोई खतरा नहीं है परंतु ,… ( Serious music start)
राम - परंतु क्या
मंत्री - परंतु,… परंतु… कुछ नहीं महाराज ।
राम - मंत्री श्रेष्ठ मुझे आभास हो रहा है कि आप मुझसे कुछ छुपा रहे है।
सामंत आप कहिए गुप्तचर से क्या समाचार प्राप्त हुए हैं ।
सामंत - महाराज नगर के गुप्तचर से समाचार प्राप्त हुए हैं की प्रजाजन में महारानी सीता के संबंध में कुछ अपवाद है ।
राम - अपवाद…?
सामंत - जी महाराज ।
राम - गुप्तचर को उपस्थित होने का आदेश दिया जाए
द्वारपाल - गुप्तचर उपस्थित हों …
(7 सेकेंड)
( गुप्तचर एंट्री म्यूजिक ट्रैशन )
राम - कहो गुप्तचर क्या समाचार लाए हो ।
गुप्तचर - महाराज हम विवश है आपके आदेश का पालन करना हमारा दायित्व है। संपूर्ण समाचार सत्य असत्य की समीक्षा किए बिना कहना मेरा कर्तव्य है।
महाराज प्रजा में अपवाद है कि,…( छंद – चली प्रजा में अचानक …)
लक्ष्मण - भ्राता श्री ये मैं क्या सुन रहा हूँ । (गुस्से से गरज उठने क sound effect )
राम - शांत हो जाओ लक्ष्मण।
(3सेकेंड ) music शांत
सभा विसर्जित की जाए ।
सभाजन - प्रणाम महाराज
(5सेकेंड)
म्यूजिक change soft tension angry
लक्ष्मण - साकेत की प्रजा का इतना साहस की वो माता सीता के बारे में अन्यथा बोले ।मैं उन्हें उनके इस अपराध का दंड आवश्य दूंगा ।
राम - भ्राता लक्ष्मण धैर्य रखो आप व्यर्थ ही क्रोध करते हो। इसमें भला इसमें भला प्रजाजन का कैसा दोष ।
लक्ष्मण - परंतु भैया लोक व्यवहार में एक उक्ति है ,की भाषी मां समान होती है ।और इस नाते सीता मेरी माता हैं और ये लक्ष्मण उनका पुत्र और यदि कोई मेरी माता सीता के बारे में कुछ भी लांछन लगाएगा तो उसे ये लक्ष्मण बिल्कुल भी सहन नहीं करेगा।
राम - लघु भ्राता अभी आप विश्राम करो जो भी होगा न्याय नीति पूर्वक होगा
लक्ष्मण - जी भैया।
(5सेकेंड)
टेंशन से thinking music
Shri ram विचार करते है
राम - यद्यपि सीता शीलवती है तथापि प्रजा भी ठीक ही कह रही है। पराए घर से आई हुई स्त्री को अपने घर पर रखना योग्य नहीं है ।मैं राजा हूं मुझे न्याय नीति विचार कर निर्णय लेना होगा अन्यथा अमंगल होगा नहीं - नहीं सीता के साथ मैं इतना निर्दयि कैसे हो सकता हूं। लेकिन राज्य धर्म पहले है ।( छंद – संगीत रहा न कभी सिया से दूर) कहीं सीता के अपवाद से लोक में पापाचार की परंपरा प्रवर्तित ना हो जाए मुझे सीता का परित्याग करना ही होगा ।
(3सेकेंड )
राम – सेवक…
(5सेकेंड)
सेवक - जी महाराज
राम - सेनापति कृतांत वक्र को उपस्थित होने का आदेश दिया जाए ।
सेवक - जी आज्ञा महाराज
(7सेकेंड)
सेनापति - प्रणाम महाराज ।
राम - सेनापति जी आप जाइए और सीते को तीर्थ यात्रा के बहाने से वन में छोड़ आइए। (गरज sound effect)
सेनापति - महाराज।
राम - आज्ञा का पालन हो।
सेनापति - जो आज्ञा ।
पार्ट 4
दृश्य - 4
सॉफ्ट tension
(रथ की आवाज horse feet sound effect के साथ 25 sec)
(7सेकेंड) सीता के लिए
सीता - सेनापति जी आपको तो तीर्थयात्रा का आदेश था ना। लेकिन मुझे न तो यहां कोई जिनालय न ही कोई जिनबिंब दिखाई दे रहा है।
सेनापति - *(रूदन स्वर में)*मुझे क्षमा करे मां । मैं जीवन पर्यंत अपने आप को माफ नहीं कर पाऊंगा।
सीता - क्यों क्या हुआ सेनापति जी। आप क्षमा क्यों मांग रहे हैं ।साफ साफ बताइए क्या बात है।
सेनापति - मां प्रभु श्री राम ने आपको वन में छोड़ने का आदेश दिया है। लोकापवाद के कारण प्रभु ने आपका त्याग कर दिया है।
सीता_ क्या…? (गरज टेंशन साउंड effect आवाज) (sad music)
(कुछ विचार करके) ठीक है पर आप दुखी न हों।
सेनापति - मैं बहुत अभागा हूं मां!
सीता - राजा की आज्ञा का पालन करना आपका कर्तव्य है।सेनापति जी आप मेरा एक संदेश प्रभु से जाकर कहिए। जिस प्रकार लोकापवाद के कारण प्रभु ने मेरा परित्याग कर दिया। कहीं इसी भय से वो धर्म का परित्याग न कर दें।क्योंकि मेरा त्याग करने पर तो उन्हें कुछ दिनों की कुछ वर्षों की पीड़ा सहन करनी होगी, परन्तु धर्म का परित्याग करने पर उन्हें भवों भवों की पीड़ा सहन करनी होगी। भवों भवों की…
सेनापति - जी माते!
(संगीत ___ अरे निंदा सुनकर मेरी…)
(सीता का वन में दुखों का चित्रण काव्य)
म्यूजिक – जनक दुलारी
(5सेकेंड) सॉफ्ट म्यूजिक …
(वज्रजंघ का आगमन) (दूर से देख कर विचार करते हैं)
बज्रजंघ - अरे यह स्त्री कौन हैं जाकर देखता हूं,
(9 सेकेंड)
वज्रजंघ - बहन तुम्हारी यह दुर्दशा कैसे हुई तुम तो महलों की रहने वाली प्रतीत होती हो कौन हो तुम तुम्हारी ये दशा कैसे हुई?
Sad music
सीता - भ्रात में जनक दुलारी मां विदेहा की पुत्री अयोध्यापति श्री राम की भार्या सीता हूं। श्री राम ने लोकापवाद के कारण मेरा परित्याग कर मुझे इस निर्जन वन में छोड़ दिया है।
वज्रजंघ - बहन! आप मेरे साथ मेरे महल में चलो! आप मेरी धर्म बहन हैं, मैं आपको कोई दुःख नहीं होने दूंगा ।
सीता - धन्यवाद भ्राता लेकिन मैं आपके साथ नहीं जा सकती ।
वज्रजंघ - कैसी बात करती हो बहन! अपनी नहीं तो कम से कम अपनी कोख में पलने वाले शिशु के बारे तो विचार करो। मैं आपकी कोई बात नहीं सुनूंगा चलिए आपको चलना ही होगा।
(सीता वज्रजंघ के साथ उसके महल चली जाती है)
पार्ट 5
दृश्य - 5
(लवकुश का जन्म)
Starting में Cry साउंड add करना है
(आंचल में ले सीता निहारे…)
2 min
पार्ट 6 दृश्य - 6
(Fute peace music)
(15सेकेंड)
लव कुश - प्रणाम गुरुदेव
गुरुदेव - कल्याण मस्तु वत्स
बालकों आज मैं आप लोगो को जीवन सफल बनाने वाला मंत्र दुगा में बोलता हु
आप लोग उसे दुहराना*
लव कुश - जी गुरुदेव
गुरु जी - शुद्धोऽस्मि अहम
लव कुश - शुद्धोऽस्मि अहम
गुरु जी -बुद्धोऽस्मि अहम
लव कुश - बुद्धोऽस्मि अहम ।
लव - गुरु देव इसका अर्थ क्या है
गुरु जी - इसका अर्थ है मैं शुद्ध हु मैं बुद्ध अर्थात ज्ञान वान हु ।समझे
लव कुश - जी गुरु जी
(5सेकेंड)
फनी टाइप म्यूजिक
नारद जी - नारायण नारायण नारायण
हे बालको आप दोनो श्री रामचंद्र सदृश धीर बुद्धि वाले एवम महान साहसी बालक लगते हो।
कुश - (हे ऋषि महराज ) हे ऋषि महाराज ये राम चंद्र जी कौन हैं ।
( वत्स… (विमल सर की आवाज़ में काव्य .. नगर अयोध्या के राजा)
Music के साथ scene end
दृश्य - 7
(add _ श्री राम के द्वारा सीता को वन में छोड़ने के प्रसंग को सुन लव कुश श्री राम से युद्ध करने के लिए अयोध्या पहुँच जाते है)
(3सेकेंड)
लव कुश - हे साकेत नरेश हम आपसे युद्ध करने आपके समक्ष आए हैं ।
लक्ष्मण - महराज आप आज्ञा दे तो मैं अभी इन बालकों से युद्ध कर उन्हें बेड़ी बनाकर लाता हूँ।
राम - लक्ष्मण ये तो बालक है इनसे भला क्या युद्ध लड़ना ।
कुश - महराज आप हमे शरीर की अपेक्षा से बालक न समझे हम आपसे युद्ध की चुनौती देते है आइए और हमसे युद्ध कीजिए।
(3सेकेंड)
राम - तो ठीक है फिर ।
(युद्ध संगीत) महा संग्राम
गुरू जी – रूकिए ये आप क्या कर रहे है
लव कुश - प्रमाण गुरू जी। (म्यूजिक शांत)
(4सेकेंड)
गुरूजी - हे राम आप को ज्ञात है आप दोनों में परस्पर क्या संबंध है ये दोनों बालक आपके ही पुत्र है एवम् सीता इनकी माता है।
राम - क्या
(Happy मिलन music ♪♪♪♪)
दृश्य - 8
सॉफ्ट टेंशन म्यूजिक
(7सेकेंड)
हनुमान – प्रभू आप माता सीता को वापिस बुला लीजिए वे आपके बिना अधूरी है
विभीषण - प्रभु आप आज्ञा दे तो माता सीता को अभी ले आते हैं।
(4सेकेंड)
राम - मैं सीता को वापस कैसे बुला सकता हु यदि सीता को वापस आना है तो उसको अपने सती होना का प्रमाण प्रजा को देना होगा।
((20सेकेंड) (चर्चा साउंड effect)
सीता - प्रणाम स्वामी
राम - वर्षों रूक जाइए सीते आपने मेरे सामने आने की चेष्ठ कैसे की आप क्यों आई हो आप इतने दिन रावण की लंका में रही मैं आपको अपने साथ कैसे रख लूं आपके निर्दोष होने का क्या प्रमाण है ।
सीता - हे स्वामी मुझे अपने सतीत्व का प्रमाण देना पड़े इससे दुर्भाग्य की बात और क्या हो सकती है परंतु यदि आपको मुझ पर संदेह है तो भला मुझे क्या आपत्ति ।स्वामी अब आप ही बताइए मैं किस तरह आपको अपनी प्रामाणिकता दूँ।
राम - हे सीते तुम्हें संपूर्ण प्रजा के समक्ष अग्नि परीक्षा देनी होगी।(बिजली बादल साउंड) गरज
सीता - स्वामी मुझे स्वीकार है मैं पवित्र हूँ मुझे इस अग्नि का कोई भय नहीं भला ये तुच्छ सी ज्वाला मेरे सतीतव की क्या परीक्षा लेगी।
( अग्नि भयानक आवाज़ 15 सेकेंड) (जय जयकार संगीत.. (कमल का खिलना देवों द्वारा संगीत) (20 सेकेंड)
राम - धन्य हो सीता तुम धन्य हो। हे सीते तुम पर अब किसी को कोई शंका नहीं अग्नि परीक्षा के बाद अब मैं तुम्हें स्वीकार करता हूँ।
सीता - नहीं स्वामी नहीं अब मैं आपके महल क्या इस संसार में ही नहीं रहूँगी।
सॉफ्ट देशन
राम - मुझे क्षमा कर दो जानकी।
सीता - नहीं नहीं स्वामी आप क्षमा क्यों माँगते हैं इसमें आपका कोई अपराध नहीं है भला आप मेरे साथ अन्याय कैसे करेंगे आपने तो वो किया जो एक राजा को करना चाहिए परंतु महाराज मैंने अब इस संसार के स्वरूप को समझ लिया है इस संसार में कहीं भी सुख नहीं है अब मैं दीक्षा धारण करूँगी और भव से मुक्त होऊँगी और इस भाव से मुक्ति पाऊँगी मुझे आज्ञा दीजिए महाराज ।
( वैराग्य छेद)
राम - नहीं सीते नहीं मत जाओ सीते मत जाओ
दृश्य 9
Flute music serious
सीता - हे माता जी वंदामी वंदामी वंदामी
माता जी - धर्म की वृद्धि हो ।
सीता - माता मुझे भवसागर से पर उतरने वाली जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान करें ।
माता जी - तुम्हारे उत्तम परिणामों की हम अनुमोदना करते हैं बेटी क्या तुमने अपने परिजनों से आज्ञा ले ली माता परिजनों ने तो मेरा पहले ही परित्याग कर दिया है अब मैंने संसार शरीर भोगों की क्षणभंगुरता का भली प्रकार ज्ञान प्राप्त कर लिया है ये संसार के भोग अब मुझे नहीं सुहाते मुझे तो अतीन्द्रिय आनंद का वेदन करना है और शाश्वत मुक्ति सुंदरी का वरण करना है आप मुझे जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान कर अनुग्रहित करें
माता जी - ठीक है बेटी तुम धर्म मार्ग का अनुसरण करो
(Music ♪♪ ♪♪ ♪♪ संसार लगने लगा अब असार…)
सीता - ओम नमः सिद्धेभ्या ओम नमः सिद्धेभ्या ओम नमः सिद्धेभ्या। म्यूज़िक चलता रहेगा
दृश्य 10
( पश्चाताप काव्य)
म्यूज़िक
नाटक की ऑडियो रिकॉर्डिंग (अवधि लगभग ३४ मिनट)
यह इसी नाटक की मंचन/पाठ रिकॉर्डिंग है।
