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दशलक्षण महापर्व 2026Dashlakshan Mahaparv 2026

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नन्हे मुन्ने ज्ञायक हम

Nanhe Munne Gyayak Hum

रचयिता Author: विराग शास्त्री (जबलपुर), देवलाली · ~6 min पढ़ने में

यह पाठ मूल पुस्तक से टाइप किया गया है; मंचन से पहले मूल PDF से मिलान कर लें।Typed from the original book — please check against the original PDF before staging.

नन्हें मुन्नें ज्ञायक हम

धार्मिक बाल कविता संग्रह

नन्हे मुन्ने
ज्ञायक हम

रचनाकार - विराग शास्त्री (जबलपुर) देवलाली

प्रकाशक - आचार्य कुन्दकुन्द सर्वोदय फाऊंडेशन रजि., जबलपुर म.प्र.

धार्मिक बाल कविताएँ

नन्हे मुन्ने
ज्ञायक हम

रचनाकार
विराग शास्त्री (जबलपुर), देवलाली

चित्रांकन
कु. निधि अनिल शाह, भावनगर गुज.

विशेष सहयोग
श्रीमति सूरजबेन अमृतखराय स्मृति ट्रस्ट, मुंबई

© सर्वाधिकार सुरक्षित प्रथम तीन आवृत्ति - ५००० अप्रैल - अगस्त २०१० मूल्य - ५० रु. (सी.डी. सहित)

  1. आओ हम सब खेलें खेल
  2. आसमान में चंदा मामा
  3. हाथी दादा कहाँ चले
  4. पानी बरसा छम छम
  5. बच्चे बोले जय जिनेंद्र
  6. रोज सवेरे जल्दी उठना
  7. एक फूल बच्चों से बोला
  8. टिक टिक टिक हाथ घुमाती
  9. चलो सैर को लोभी राम
  10. पांच रंग का सुन्दर झंडा
  11. आत्म देह का कैसा साथ
  12. मंदिर हम क्यों जाते हैं ?
  13. जिनमंदिर है समवशरण सा
  14. चिड़िया सुन ले कुट कुट कुट
  15. मेरी प्यारी नानी
  16. घंटा बोला टन टन टन

प्राप्ति स्थान

  1. बंगला नं. 50, कलान नगर सोसायटी, नाम रोड, बेलगाँव रास्ता, पो. देवलाली
    जि. नासिक- 422401 महा. मो. 9373294684, 9423212084
  2. श्री महावीर स्वामी दिगम्बर जिन मंदिर, द्वितीय मंजिल, पायलवाला मार्केट, बड़ा फुहारा, जबलपुर 482002 म.प्र.

प्रकाशक - आचार्य कुन्दकुन्द सर्वोदय फाऊंडेशन रजि., सर्वोदय, 702, जैन बन्धु, फूटाताल, जबलपुर 482002 म.प्र.

1

आओ हम सब
खेलें खेल

आओ हम सब खेलें खेल,
चलती है अब मोक्ष की रेल।
प्रभु अरहंत हैं गार्ड हमारे,
रत्नत्रय डिब्बे का मेल।
चेतन राजा जल्दी बैठो,
वरना छूट जायेगी रेल ॥

काव्य

आसमान में चंदा मामा

आसमान में चंदा मामा,
मामा मेरे घर भी आना।
तेरे ऊपर हैं जिन मंदिर,
जिनवाणी माँ का यह कहना ॥

काव्य

हाथी दादा कहाँ चले

हाथी दादा कहाँ चले ?
सूँड़ उठाकर कहाँ चले ?
मेरे घर भी आओ ना।
हलुआ-पूरी खाओ ना।

आज मैं ना खाऊँगा।
जिन मंदिर ही जाऊँगा।
आतम मेरे पास है।
और मेरा उपवास है ॥

काव्य

पानी बरसा छम छम छम

पानी बरसा छम छम छम, ऊपर छाता नीचे हम।
पानी में न खेलें हम, जीव की रक्षा करते हम।
अच्छे हम राजा हम, नन्हे मुन्ने ज्ञायक हम ॥

बच्चे बोले

जय जिनेन्द्र

बच्चे बोले जय जिनेन्द्र।
तोता बोला जय जिनेन्द्र।
अच्छे बोल सिखाता है।
सबके मन को भाता है।
आतम अनुभव पायेगा।
मोक्षपुरी में जायेगा।

रोज सबेरे जल्दी उठना

रोज सबेरे जल्दी उठना।
उठकर मंत्र नवकार को पढ़ना।
सही समय पर मंदिर जाना।
जिन दर्शन कर निज पद पाना॥

एक फूल यूं बोला

एक फूल बच्चों से बोला,
अपने भीतर का दुःख खोला।
मुझको कभी भी तोड़ो ना,
पत्ती टहनी मोड़ो ना।
जैसे तुम एक जीव हो,
वैसे हम भी जीव हैं।

काव्य

टिक टिक टिक हाथ घुमाती
जीव
पुद्गल
धर्म
अधर्म
आकाश
टिक टिक टिक घड़ी बताती।
हमें समय का मूल्य बताती।
छः द्रव्यों का समय है नाम।
समय आत्मा का भी नाम।
कुन्दकुन्द प्रभु ने बतलाया।
आतम का वैभव दिखलाया।
काल

काव्य

चले सैर को लोभीराम
चले सैर को लोभीराम।
देखा एक लटकता आम।
इस पर चढ़ने लगे पेड़ पर।
फिसला पैर तो गिरे धड़ाम।
चोरी का फल उसने पाया।
लोभ पाप का बाप बताया।

काव्य

पांच रंग का सुंदर झंडा
पांच रंग का सुंदर झंडा।
लहराता है ये पचरंगा।
जिनशासन की शान बढ़ाये।
हर जैनी के मन में भाये।
मंगलमय हम करें वंदना।
ये झंडा फहरे हर अंगना।।

काव्य

आतम देह का कैसा साथ!

आतम देह का कैसा साथ, हो आतम का ही विश्वास।
देह साथ न जाती है, आतम सच्चा साथी है।
देह को अपना मानोगे, तो चार गति में घूमोगे।
रत्नत्रय प्रगटाओगे, तो निश्चित शिवपुर जाओगे।

प्रश्नोत्तरी

मंदिर हम क्यों जाते हैं

बालक मंदिर हम क्यों जाते हैं?
पिता जिनदर्शन क्यों करते हैं।
बालक भगवन जैसा बनना है।
पिता तो दर्शन उनके करना है।
बालक जैसा प्रभु ने काम किया।
पिता हम भी वैसा काम करें।
बालक जिन सम ही बन जायेंगे।
पिता लौटकर हम न आयेंगे।

काव्य

जिन मंदिर है समवशरण सा

जिनमंदिर है समवशरण सा।
सदा ही रखना इसका ध्यान।
मंदिर का करना सन्मान।
यहाँ न करना खान-पान।
खेलकूद तज करना ध्यान।
प्रभु सम निज आतम पहचान।
सदा ही करना भक्ति गान।
जिन मंदिर का रखना ध्यान।।

चिड़िया सुन ले कुट-कुट-कुट

चिड़िया सुन ले कुट-कुट-कुट।
तू भी खा ले ये बिस्कुट।
भूख लगी है खा ले तू।
खाकर ही उड़ जाना तू।

बिस्कुट मैं ना खाती हूँ।
दाना पानी लेती हूँ।
बिस्कुट हैं बाजार के।
घर में बनाओ प्यार से।
बड़े प्यार से खाऊँगी।
वरना भूखी रह जाऊँगी ॥

मेरी प्यारी नानी

मेरी प्यारी-प्यारी नानी।
रोज सुनाती नई कहानी।।
अच्छी-अच्छी कथा सुनाये।
पाप मार्ग से हमें बचाये।
जिनशासन के वीर पुरुष की,
गौरव गाथा रोज बताये।
चश्मा पहने प्यारी नानी।
रोज सुनाती नई कहानी।।

घंटा बोला टन-टन-टन

घंटा बोला टन-टन-टन।
मेरी भी आवाज को सुन।
जिन मंदिर नित आना तुम।
अरहंतों की पूजा सुन।

स्रोत: Gyata संग्रह।

प्रूफरीडिंग बाकी है

स्रोत · Source: forum.jinswara.com — अनुमति सहित, साभार · shared with permission and thanks.

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