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दशलक्षण महापर्व 2026Dashlakshan Mahaparv 2026

नाटक स्क्रिप्ट · Play script

शीलशिरोमणि महासती चंदनबाला

Mahasati Chandanbala

~12 min पढ़ने में

शीलशिरोमणि महासती चंदनबाला — चम्पापुर की राजकुमारी चंदनबाला के शील, धैर्य और मुनि वर्धमान को आहार-दान की कथा पर आधारित मंचन योग्य नाटक स्क्रिप्ट (सूत्रधार, गाँववाले, विद्याधर, भील, वेश्या, सेठ ऋषभदत्त आदि पात्र; ध्वनि-संकेत सहित)। Stage-play script on Mahasati Chandanbala for Dashlakshan Parv


शीलशिरोमणी महासती चंदनबाला नाटक

गाँव वाला (सौम्य) - अरे भाई ! कैसी विधि मिल गयी ? (Morning Flute)

सूत्रधार (पर्युलभैया ) - अरे भाई मुनि वर्धमान को आहार की विधि मिल गयी (Morning Flute)

सभी गांववाले एक साथ बोलते हुए - धन्य दातार धन्य पात्र *3 (Morning Flute)

गाँव वाला (सौम्य) - अरे भाई कौन थे वे पुरुष जिन्होंने मुनि वर्धमान को आहार दिया (Morning Flute)

सभी गांववाले एक साथ बोलते हुए - हां हां कौन थे वे हमें भी बताओ (Morning Flute)

सूत्रधार (संवेग भैया) - अरे वे कोई पुरुष नही अपितु वह तो महासती चंदनबाला हैं| जिनके शील के प्रताप ने सहस्त्रो सूर्य और चंद्रमाओ को भी परास्थ कर दिया| धन्य हैं ऐसी महासती जिनकी चर्चा स्वर्ग में देवतागण भी करते हैं | (Morning Flute)

गाँव वाला (सौम्य) - अरे वे महासती चंदनबाला कौन थी जो स्त्रियों में शिरोमणि थी एवं जिनके निमित्त से मुनि वर्धमान को आहार मिला | जरा हमें भी ऐसी पुण्यवान सती के पुण्यचरित्र से अवगत कराओ | (Morning Flute)

गाँव वाला (ज्ञायक) - हाँ भाई ! में और यहाँ उपस्थित सभी सभासद उन महासती के चरित्र को जानने के लिए अत्यंत आतुर हैं| कृपया शीघ्र ही बताए|

सभी गांववाले एक साथ बोलते हुए - हां हां हमें भी उनके बारे में बताओ (Morning Flute)

सूत्रधार (पर्युलभैया ) - तोह चलिए चलते हैं इतिहास के उन पन्नो पर जहाँ एक महासती ने पवित्र जिनधर्म की पताका को लहराकर एक अद्भुत सन्देश दिया | तो प्रस्तुत है आप सभी के समक्ष शीलशिरोमणी महासती चंदनबाला | (Morning Flute)

सूत्रधार (संवेग भैया ) - चम्पापुर नगरी के राजा दधिवाहन / रानी धारणी की पुत्री शील शिरोमणी, महासती, गुणनिधी, धर्मपरायण चंदन बाला जीवन की ओर । (Morning Flute)

सूत्रधार - (पर्युलभैया)- एक दिन महासाति अपने सखी के साथ बगीचे में क्रीडा कर रही थी| तभी… (Morning Flute)

विद्याधर (श्रेयस भोगांव भैया ) - वाह ! वाह ! अद्भुत अति अद्भुत उत्तम से भी उत्तम क्या रूप है, क्या सौंदर्य है, ऐसी रूपवती कन्या तो मेरे महल के योग्य है| चल-चल मेरे साथ में तुझे अपनी रानी बनाऊंगा, तेरे बिना यह संपूर्ण राज-वैभव, यह रूप सभी निष्फल हैं | (Thunder Sound)

चंदनबाला (नभ भैया) - दुष्ट! पापी! छोड़ दे मुझे, दीप सीखा को हाथ लगाएगा तो अवश्य ही जलेगा, रे पापी! भली प्रकार समझ ले मुझ जैसी शीलवती का तेज तुझे अवश्य ही जलाकर भस्म कर देगा|

विद्याधर (श्रेयस भोगांव भैया ) - चल चल मेरे साथ चल |

चंदनबाला (नभ) - छोड़ दे मुझे! पिताजी रक्षा करो, हे अरिहंत! हे सिद्ध! रक्षा करो|

सूत्रधार - (संवेग भैया)- तभी कुण्डलमंडित विद्याधर अपनी स्त्री को पीछे आता देख कौशांबी के भयंकर वन में महासती को छोड़ देता है| उस महाभयंकर वन में महासती की स्थिति कैसी होगी, आइये देखते हैं | (Morning Flute)

चंदनबाला (नभ भैया) - हे जिनेन्द्र प्रभु! कर्मोदय से ये मैं कहाँ आ गयी ,क्या मैंने सत गुरुओं की निंदा की ,क्या मैंने किसी को कटुक वचन कहे ,क्या मैंने सतियों को दोष दिया अथवा मैंने हिंसा के कर्म किए| हे नाथ! अब समझ आता है पूर्व कर्म अवश्य ही बलवान है| (Thunder Sound)

अर्पित भैया - सिंह दहाड़े कूके भेड़िया…

सूत्रधार(पर्युलभैया ) - कर्म विचारे कौन भूल मेरी अधिकायी, अग्नि सहे घन घात लोह की संगती पाई -----

और दुःख का अंत अभी भी नही हुआ| तभी वहां भीलों का राजा आता है और वह भी सती को देखकर कामांध हो जाता है ।। (Morning Flute)

भील (अर्हम भिंड भैया ) - वाह! वाह! अद्भुत इस महाभयंकर वन में यह परमसुन्दरी कहा से आई? यह तो स्वर्ग की अप्सरा प्रतीत होती है ,चल मेरे साथ!, मैं तुझे अपनी दासी बनाऊंगा…चल, हा हा हा हा (Thunder Sound)

चंदना(नभ भैया ) - हे अरिहंत प्रभु! रक्षा करों, अब यह क्या कौनसी विपत्ती आन पड़ी है इन विपदाओं का तो अंत ही नहीं आता अब यहाॅं मुझे दुखयारी को माता, पिता,भाई, बंधु कोई शरण नहीं… .

भील (अर्हम भिंड भैया) - हां हाआअचल मेरे साथ अन्यथा मैं तेरे केश पकड़कर घसीटकर ले जाऊंगा..। हाआअ हा हाआआ ---------------

चंदना (नभ भैया) - छोड़ दे मुझे अन्यथा यह सती यहीं प्राण त्याग देगी I (Thunder Sound)

भील (अर्हम भिंड भैया) - यह तो महाशीलवती लगती है यह ऐसे नही मानेगी इसका कुछ और ही उपाय करना होगा , एक काम करता हूँ , मैं इसको वैश्य को बेच देता हू मुझे इसका अच्छा दाम भी मिलेगा ह़ा हाआआ हा … चल मेरे साथ चल … (Thunder Sound)

सूत्रधार (संवेग भैया) - इस प्रकार भील की सारी कुचेष्टाएं निष्फल होती है वह महासती को राजग्रही के चौराहे पर वसंतसेना नमक वेश्या को बेच देता है तभी वहां ऋषभदत्त सेठ आकर कन्या को धर्मि जानकर खरीदकर अपने साथ ले जाते है, तभी… (Morning Flute)

वैश्या (अनुभव भैया ) - “अच्छी बोली , अच्छे दाम |

जैसी कन्या , वैसे दाम ||

वाह ! वाह ! वाह! अद्भुत अद्भुत आज तो बाज़ार में बहुत सुन्दर कन्या आई है बताओ ऐसा कौनसा पुरुष होगा जो इस सुंदरी को उचित दामों में खरीदेगा ,लगाओ बोली ! (Sad Song)

सभी बोली लगते हुए - बोली लगते हुए (Sad Song)

चंदना (नभ भैया) - चंदना की बीच में बोली लगती है ( स्टूलपर खड़ी ) (Sad Song)

*अरिहंत सिद्ध - SLOW

ऋषभदत्त सेठ (देव) - हे नाथ ! आज इस सेठ ने संसार का भिवत्स स्वरुप इन आखो से देख लिया (कैसा है यह संसार ? ) जहा कर्मोदय से राजपुत्री महासतियां भी चोराहे पर विकने आ जाती है | इससे ज्ञात होता है की कर्म आवश्य ही बलवान है , जिसने राजा अथवा रंक किसी को भी नही छोड़ा

वैश्या (अनुभव)-

ऋषभदत्त देव (सेठ) - बस ! ये लो १०००० दीनार और इस कन्या को मुझे सौप दो-(SAD SONG

अनुभव (वैश्या ) - लीजिये सेठजी ! आज से यह परमसुन्दरी आपकी हुई | अरे वाह ! मै तो मालामाल हो गई …

( अर्पित भैया ) - “ कोई सहारा है नही यह सोच मत लाना ---- णमोकार मंत्र

सूत्रधार (पर्युलभैया) - देखो कर्मोदय की लीला जिसने शीलवती राजपुत्री को भी सडको पर ला खड़ा कर दिया

सच ही कहा है कर्म करते समय जीव चेत उदय समय क्या चिंत… (Morning Flute)

सेठ (देव भैया ) - पुत्री अब तुम्हे घबराने की कोई आवश्यकता नही यहाँ तुम्हे किसी भी प्रकार की कोई भी परेशानी नही होगी अरे ! पुत्री तुम तो उच्चकुलीन प्रतित होती हो ,तुम्हारे वस्त्र तुम्हारे नेत्र तुम्हारी अपनी लज्जा इसके परिचायक है पुत्री तुम मुझे अपना पिता समझकर इस घर में निर्भय होकर रहो

चंदना( नभ भैया ) - हां पिताजी आपने तो मेरे शील की रक्षा करी है , हे तात इस सती पर आपका अनन्त उपकार रहेगा

दासी(वंश भैया) - सेठानी ओ सेठानी सुनती हो करती रहो तुम यहाँ झाड़ू पौछा वहां सेठ जी तुम्हारी सौतन लाये हैं… -

सेठानी (मुदित) - क्या कौन है वह कुलटा अभी देखती हूं उसे (Gussa Wala Song)

सेठानी(मुदित) - अरे! ये ,ये मेरा घर उजाड़ेगी इसे तो में अच्छा सबक सिखाउंगी

सेठ(देव भैया ) - अरे ! भाग्यवान सुनती हो , मैं 3 दिन के लिये व्यापर हेतु इस नगर से बाहर जा रहा हूँ इस पुत्री का

भली प्रकार से ख्याल रखना

सेठानी(मुदित ) - हां हां आप निश्चिन्त होकर जाइये में इसका मैं अच्छे से नही बहुत अच्छे से ख्याल रखूँगी

सेठानी (मुदित ) - कुलटा मेरी सौत बनेगी मेरे पति को छीनेगी - रुक अभी बताती हूँ तुझे (Gussa Wala Song)

चंदनबाला(नभ भैया ) - नही माँ मेरे प्रति आपकी जो धारणा है वह कदापि उचित नही है , सेठजी तोह मेरे धर्मपिता है

सेठानी (मुदित) - दुष्टा अब मैं एक शब्द और तेरा नही सुनूंगी

चंदनबाला(नभ भैया ) - परन्तु माँ ------

सेठानी (मुदित ) - चुप्प्प्प कर -----

सूत्रधार(संवेग भैया ) - महासती चंदना अब मौन स्वीकारती है

वे विचारती है यह संसार रहने योग्य नहीं है यदि अब इस विपत्ति से छूटी तो नीयम से भगवती जिन दीक्षा अंगीकार करूँगी---- (Morning Flute)

अर्पित भैया - नही दोष …

सूत्रधार (पर्युल भैया ) - और देखते ही देखते २-३ दिन बीत गये परन्तु सेठ जी घर वापस नही आय यहाँ सती का शरीर अन्य जल न मिलने से अत्यंत क्षीण हो गया और एक दिन (Morning Flute)

सेठानी (मुदित ) - दासी रे दासी इस दुष्टा का सर मुंडवा के काल कोठारी में बंद कर दो और इसे अन्न जल एक कण भी मत देना

सेठ(देव भैया ) - पुत्री चंदना पुत्री चंदना कहाँ हो

हे दासी मेरी पुत्री कहाँ शीघ्र बताओ - -

सूत्रधार(पर्युलभैया ) - दासी मौन रहती है और काल कोटरी की ओर देखकर चली जाती है ----- तभी सेठ जाकर देखते है तो स्तभ्ध रह जाते है तथा वे शीघ्र ही लोहार के पास जाते है परन्तु जाने से पहले उबले हुए उड़द एवं प्रासुक पानी सती को देखकर जाते हैं (Morning Flute)

सूत्रधार(संवेग भैया ) - और तभी महातपोनिधि व्रत्तिपरिसंख्यान व्रत के धारी मुनिराज वर्धमान ५ महीने २५ दिन के उपवास के बाद चंदना के द्वार पर आते है (Morning Flute)

चंदना (ओजस्व भैया ) - हे ---- स्वामी , हे स्वामी नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु आहार जल शुद्ध है कृपया आहार ग्रहण कीजिये (Morning Flute)

LAST - (जय बोलो त्रिशला के वीर की जय जय बोलो प्रभु महावीर की) DANCE

स्रोत · Source: forum.jinswara.com — अनुमति सहित, साभार · shared with permission and thanks.

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