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दशलक्षण महापर्व 2026Dashlakshan Mahaparv 2026

ऑनलाइन पाठ · Read online

ज्ञान पहेली

Gyan Paheli

रचयिता Author: जिनम् ज्ञानशाला · ~3 min पढ़ने में

यह पाठ मूल पुस्तक से टाइप किया गया है; मंचन से पहले मूल PDF से मिलान कर लें।Typed from the original book — please check against the original PDF before staging.

ज्ञान पहेली

जिनम् ज्ञानशाला द्वारा आयोजित
ज्ञान पहेली


एक अक्षर का मेरा नाम, मैं हूं पंच प्रभु का धाम।
सब जन करते मेरा ध्यान, बताओ तुम मेरा नाम।।
ऊँ


  1. तीन अक्षर का मेरा नाम अन्त कटे तो मैं ही सब हूँ।
    मुझमें लोकालोक झलकते मैं हूँ अनन्त सुखों की खान॥
    सर्वज्ञ

  1. दुनिया में है मेरा तांडव , सबसे बड़ा अधर्म कहलाती, जीव दुखी है मेरे द्वारा,जल्दी बताओ क्या कहलाती।।
    हिंसा

  1. मननशील कहलाता हूँ चारों गति में जाता हूँ
    संयम धारण करके मैं, मुक्तिपुरी भी जाता हूँ॥
    मनुष्य

  1. जिसके सिर पर मैं हूँ आता, उसके होंठ भुजा फडकाता।
    जो मुझमें अंधा हो जाता, छोटा बडा न उसे सुहाता॥
    क्रोध

  1. एक नागिन की ऐसी करनी, सब कुछ चट कर जाती है।
    तृष्णा के वह बस में रहती, धर्म भ्रष्ट करवाती है॥
    रसना इन्द्रिय

  1. एक पर्वत इतना बड़ा,मध्य लोक नाभि में खड़ा । तीर्थंकर का नह्वन भी होता, बतलाओ में क्या कहलाता।।
    सुमेरू पर्वत

  1. मुनि संघ का मुखिया हूँ, दीक्षा शिक्षा देता हूँ। संघ का संचालन करता ,निज आत्म में रहता हूँ।
    आचार्य परमेष्ठी

  1. नीचे सात चोर हैं काले, ऊपर बैठे सुन्दर चाँद।
    बीच सुमेरू द्वीप समन्दर, बीच बनी है नदियाँ बाँध॥
    तीन लोक

  1. मुक्ति वधु जो दर्पण देखे, वचन सुनावे अमृत जैसे।
    रत्नत्रय का मुकुट सजाये, भेद ज्ञान परिणति करवाये॥
    जिनवाणी

  1. चार अक्षर का मेरा नाम, मेरा नाम है बडा महान।
    प्रथम ग्रंथ के कर्ता को, मैंने ही बस दिया ज्ञान॥
    धरसेन आचार्य

  1. नौ नाली जिस नगर में सदा रहें बरसात।
    गली गली में रोग है, सडा करे दिनरात॥
    शरीर

  1. सीमंधर के पास गये जो, उत्तम अनुभव शास्त्र रचे ज्यों।
    पंचम युग के देव कहाये, उनका नाम आप बताये॥
    कुन्दकुन्द आचार्य

  1. चार अक्षर का मेरा नाम, चार छोडकर आया हूँ।
    चार साथ में लाया हूँ, फिर भी पूज्य कहलाया हूँ॥
    अरहंत

  1. मेरा मस्तक है सबसे ऊँचा, बोलो क्या है मेरा नाम।
    मैं रावण को नरक ले गया, सब संसारी में मेरा धाम॥
    मान कषाय

  1. मोक्षपुरी एक ने पाई, एक को हुया परिपूर्ण ज्ञान।
    उस दिन का तुम नाम बताओ, नहीं रहेगा तुम्हें अज्ञान॥
    दीपावली

  1. छह अक्षर का मेरा नाम, समवशरण में मेरा काम।
    सबको मुक्तिमार्ग बताना, कितना सुन्दर मेरा काम॥
    दिव्यध्वनि

  1. सब पापी मेरे घर आते, सात घरों में दुख पाते।
    तिल तिल करें देह के खण्ड, भूख प्यास भी लगे प्रचण्ड॥
    नरक

  1. सब लोगों का माल हडपना, सबको में पहुँचाती जेल।
    सबकी बदनामी करवाती, बतलाओ ये है कैसा खेल॥
    चोरी

  1. सत्य अहिंसा के अनुरागी, वीतरागता जिनकी नामी।
    तीस वर्ष में मुनि पद पाया, देवों तक ने उनको गाया॥
    महावीर भगवान

जय जिनेन्द्र

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स्रोत · Source: forum.jinswara.com — अनुमति सहित, साभार · shared with permission and thanks.

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