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दशलक्षण महापर्व 2026Dashlakshan Mahaparv 2026

नाटक स्क्रिप्ट · Play script

अष्टमद — लघु नाटिका

Ashtamad (Eight Kinds of Pride)

~12 min पढ़ने में

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आठ प्रकार के मद (कुलमद, जातिमद, बलमद, रूपमद, तपमद, ज्ञानमद, पूजामद, ऐश्वर्यमद) पर व्यंग्यपूर्ण पात्रों के माध्यम से उत्तम मार्दव धर्म (निर्मानता / निरभिमानता) का मर्म समझाती मंचन-योग्य लघु नाटिका — जिस भी वस्तु का घमंड है वह वास्तव में हमारी है ही नहीं। दस लक्षण पर्व, पाठशाला व बाल संस्कार शिविर मंचन हेतु आदर्श।

A short staged natika on the eight kinds of pride (mad) and Uttam Mardav dharma (humility) — a Jain Dashlakshan drama for pathshala and children’s programs. Jain natak script / Dashlakshan natak.


(एक लघु नाटिका)
(1)
कुलमद

  • नमस्कार परणाम परणाम भाइयो और बहनों मैं यहाँ से गुजर रहा था तो देखा की यहाँ बहुत भीड़
    है तो सोचा थोडा मिलजुल लू
    वेसे हम बहुत ही बड़े कुल से सम्बन्ध रखते हम आपको अपना परिचय देते है
    हम है चिंदी लाल गरीबदास फकीरचंद फटेहलपुर कहाँ के फटेहलपुर| हम अपने गाव के इकलौते इसे जमींदार है
    जिनकी अंग्रेजों से दोस्ती थी| हमारे पिताजी के पास दस-दस वीगा जमीन थी कितनी दस-दस वीगा|
    हमारे गाव को नापने के लिए जाओ तो यी छोर से यूं छोर तक पच्य्ने में सुबह से शाम हो जाये| हा समझ|
    ये कुछ भी नही है हमारे पिताजी के पास हाथी घोडा बैल गाये इतने सारे -2 जानवर थे की यदि उनके एक दिन के
    मल खो इक्त्ठोओ करो जाये तो क़ुतुब मीनार कड़ी हो जाये का कड़ी हो जाये क़ुतुब मीनार और पता है हमाये
    पिताजी उन जानवरों को अपने बच्चो की तरह पालत ते बिलकुल अपने बच्चो की तहर , अंग्रेजो के समय में दस
    दस बंगला थे |
    (२)जातिमद( राजस्थानी वेशभूषा में प्रवेश करता है ) तू दूर हो जा मारे से अपुन्यो लगे छे जो सब थारा
    जानबराम का कुटुम मीनार तू ही साफ़ करे छे हट जा मारे सामने से सारो मूड ख़राब कर दियो इनने तो छोडो
    मारो नाम रतन सिंह छे रतन सिंह नाम तो सुन्यो ही होग्यो अरे रजा महराजा की जाती को छू में महारा मामा
    महराज हीरा सिंह जी नाम तो सुन्यो होग्यो | राजपूताना 10 10 शहरो पे राज करू छू | महरे मामा को एसो सुन्दर
    महल छे की देखत मन खुश हो जाये अंग्रेज सर विलियम जोन्स नाम तो सुन्यो होग्यो जाने तो मामाजी को राय
    बहादुर की उपाधि भी \दी छू अर बाकि उनकी सुन्दरता का काय बखान करू महारा मामा इतना सुन्दर छे इतना
    सुन्दर छे …||
    (3)रूपमद-बोल बोल कितना सुन्दर है तेरा मामा बोल की उसको देखकर चाँद भी सरमा जाये या बोल दर्पण
    के जेसा इतना स्वच्छ की लोग उसमे अपना चेहरा भी देख ले| परन्तु अब इन सब का कोई फायदा नही क्योकि ये
    सारी उपमाये इस रूपमती पर पहले यूस हो चुकी है
    चिन्दीलाल- कौन रूपमति?
    रूपमती- मूर्ख मैं रूपमती और कौन चाँद के जैसा रूप है मेरा
    (लिपस्टिक लगते हुए) पता है ये फैशन क्रीम वाले ब्यूटी पार्लर बाले तो मेरे पीछे ही पड गए की प्लीज मेम एक ऐड
    करलो प्लीज पर मैंने तो साफ़ इंकार क्र दिय्या की न बाबा न
    और पता है मैं अभी अभी बड़े बड़े डायरेक्टर रोहित शेट्टी और करण जोहर से मिल कर आ रही हूँ चार चार
    फिल्मो को साइन करके आ रही हूँ
    (4)बलमद ये—हाथ अगरबत्ती पैर मोमबत्ती हट जा मेरे रास्ते से हट जाओ सभी जगह करो मेरे लिए हा हा
    हा हा मैं पहलबान सुल्तान हूँ सुलतान जानते हो मेरे लिए
    मैं एक एक दिन में 500 500 दण्ड पेलता हूँ मैं अपने एक दिन के सुबह के नाश्ते में 5 लीटर दूध मलाई मर के एक
    सांस में गटक जाता हूँ और खाने में 40 40 रोटी रगड़ जाता हूँ

आपको पता एक मैं बस में जा रहा था तो मुझे बहुत गर्मी लगी तो मैं अपने हाथ तो यू किया और खि
ड़की ही
टूट गयी अपन को क्या अपन को हवा आने लगी
और क्या बताऊँ आपको ये खली हैं wwe का खि
लाडी ये अपना ही चेला है|
मैं भरे ट्रक को अपन भुजाओ से युही खीच लेता हूँ मेले मैं बड़े बड़े पहलबान धूल चाट जाते हैं |||
(5)धनमद- अरे चल चल हट जा मेरे रास्ते से मोटे गेंडे तू इन्सान है या जानवर,ये तेरे पैर है या कुआ, न
जाने कहाँ कहाँ से चले आते है |
लुन्ग्गी छाप लोग,पहनने को कपडे तो है नही और मोटे के मूछो के बाल तो देखो| हा हा हा
मुझसे मिलो मैं हूँ सेठ करोड़ीमल| मेरे पास 10 10 फेक्टरियाँ है और 20 तो दल मीले है ओ भाई चिन्दीलाल
फाटेहालपुर में नहीं मुंबई है मुंबई मे|
तुझे पता है में अपने बेटो को रोज 1000 रूपये तो पॉकेट मनी देता हूँ तू जनता है क्या होती है पॉकेट मनी,तू क्या
जानेगा तेरे पास तो पॉकेट ही नही है| हा हा हा
और तू क्या अपनी ताकत दिखा रहा है रे तेरे जैसे पहलबान तो मेरे घर पे चौकीदारी करते है ताकत से कुछ नही
होता सब कुछ पैसो से होता है पैसे है तो गाडी बंगला सब कुछ है नही तो जिन्दगी फटेहाल है फटेहाल| अब कभी
भूलना नही मेरा क्या है
करोड़ीमल(सब एक साथ बोलते है)
(ज्ञानमद)-अरे सेठ जी नमस्कार-2 क्या नाम बताया अपना?
सेठजी- करोड़ीमल (मूछो को ताव देते हुए)
अच्छा ठीक है जरा अपना नाम लिखकर तो बताइए
सेठजी –(कुछ सोचकर और पसीना पोछते हुए)अंगूठा चलेगा क्या?
हा हा हा इतने बड़े सेठ और अपना नाम तक लिखना नहीं आता जब नाम लिखने की बारी आई तो अंगूठा दिखाने
लगे|
चलो छोडिये मुझसे मिलो मैं हूँ प्रोफ़ेसर ज्ञानचंद मुम्बई के सबसे बड़े विश्वविद्यालय में पड़ता हूँ मेरी सेलरी
10000000 करोड है
आपको पता मैंने BA,MA,BSC,MSC,BCom,MCom,पीएचडी ,और न जाने कितनी सारी डिग्रियां हासिल की है और
सेठ जी पैसो से नहीं ज्ञान से समझ आया
और पता है मुझ्र ये बाला मैडल शिक्षामंत्री ने और ये बाला राष्ट्रापति जी ने दि या है (मैडल दिखाते हुए)
पैसो सो कुछ नही होता यदि ज्ञान हो तो पैसा पीछे पीछे भागता है
सेठजी –ऐसा किस महापुरुष ने कहा
मैंने प्रोफ़ेसर ज्ञानचंद ने समझे |||
(7)प्रभुतामद-नेता जी का प्रवेश (फ़ोन पर बात करते हुए)
हा हा आपका काम हो जायेगा,अरे जब हमने जबान देदी तो हो जायेगा,अरे पागल मेरी जबान तो मेरे मुहं
में है जबान देदी मतलब वचन देदिया समझे हा चलो अब फ़ोन रखो(अपने PA को फोंन देते हुए)
हा तो भाइयो और बहनों हम है नेता गन्नाहजारे कौन गन्नाहजारे|
गन्नाहजारे जिंदाबाद -2
अरे घबराइए मत हम यहाँ वोट मागने नहीं आये चुनाव तो अभी बहुत दूर है वो तो बीएस यहाँ से गुजर रहा था तो
देखा ये मूर्ख झगड़ रहे थे आ गए|

ये भाई ज्ञानचंद मेरे फूफाजी के मामाजी के साले जी ताऊजी के लड़के है बड़ी बड़ी डींगे हांक रहे थे पहले इनके यहाँ
खाने पीने के भी लाले थे हम ही ने इन्हें यहाँ तक पहुचाया है मेरे पास आया और कहता है कि भाईसाब कोई छोटी
मोटी नौकरी हो तो दिला दो फिर क्या हमें भी दया आ गई और फ़ोन घुमाया और आज देखो आपके सामने है|
और देखो हमने पूरे भारत में लाखों शौचालय बनवाये है और तत्काल तीन तलक बिल पास किसने करवाया और
अभी वो धरा 370 और 35A हम ही ने हटवाया है|
सभी एक साथ फिर से जिन्दहजारे जिंदाबाद-2 |||
(8)तपमद-दो शिष्य आगे सभी को हटाते हुए –सुनो सुनो महातपस्वी महाज्ञानी परम दयालु करुणा के सागर
इसे 10000 क्रोधानंद महराज पधार रहे है…
स्वामी- जी का प्रवेश-भक्तजनों सबका कल्याण हो धर्मवृद्धि हो|
मैं क्रोधानंद महराज एक वर्ष से हिमालय की गुफाओ में तपस्या में लीन था जिसके प्रभाव से मेने ढेरो को प्रशन्न
किया और अनेक रिद्धियों का स्वामी बन चूका हूँ और मुझ जेसा तप करने बाला इस संसार में कोई भी नहीं है|
शिष्य- बोलो 10000 क्रोधानंद महराज की …जय
स्वामी- अरे मूर्ख महातपस्वी कोन बोलेगा हमने 20 20 दिन बिना अन्य ग्रहण किये साधना की है
शिष्य- और रोज 10 प्रकार के फल भी खाए है
स्वामी- हमने तडकती गर्मी में गर्म-2 चट्टानों पर ध्यान किया है|
शिष्य- वो चट्टान स्वामी जी के एक बाले कमरे में रखी है|
स्वामी- और हमने अनेक प्रकार के चमत्कार भी किये है|
शिष्य- उनमे इनका कम इनके शिष्यों का ज्यादा चमत्कार है|
स्वामी- इसलिए जब भी हमारा नाम लो बड़े ही सम्मान के साथ और महातपस्वी लगाना कभी मत भूलना
परन्तु भक्तजनों आज हम यहाँ कोई चमत्कार दिखने नहीं आये है|
हमने अपने एक शिष्य को तपोभूमि बनाने के लिए एक जमीन व्यावस्था करने की आज्ञा दी थी परन्तु उसने हमारी
आज्ञा नहीं मानी अरे बचपन में वो हमारी चरणों की धुई में खेलता था जिसमें बड़ा होकर आज वो इतना बड़ा नेता
बन गया है|
ज्ञानचंद- स्वामी जी कही वो नेता गन्नाहजारे तो नहीं है(नेता जी तरफ ऊँगली करते हुए)
स्वामीजी- हा.. अरे दुष्ट कृतघ्नी तूने हमारी आज्ञा न मानकर घोर दुस्साहस किया है तू नही बचेगा,शिष्य मेरा
कमंडल लाओ अभी इसे श्राप देता हूँ|
शिष्य- स्वामी जी कमण्डल तो हिमालय की गुफाओ में ही छूट गया|
स्वामीजी- अच्छा… कोई बात नही|
नेताजी- क्यों स्वामी जी कहो तो हिमालय की वापसी की टिकट करा दूँ देख लो मित्रों ये ढोंगी साधू अपनी प्रशंन्सा
के बड़े ढोल पीट रहा था लेकिन इसी का ढोल फट गया|
मानो या न मानो मैं ही सबसे महान हूँ|
(सभी अपने अपने को महान कहने लगते है आपस में लड़ने झगड़ने लगते है तभी आकाशवाणी होती)
आकाशवाणी
ओम…
अरे मूर्खो रुक जाओ यह व्यर्थ की लड़ाई बंद करो अरे जिस जिस भी वास्तु को लेकर तुम्हे घमंड है वह तो वास्तव
में तुम्हारी है ही नहीं|(कोई भी एक व्यक्ति पीछे से क्रमशः संबोधित करेगा और समझाएगा)

चिन्दीलाल और रतनसि
ंह-

प्रूफरीडिंग बाकी है

स्रोत · Source: forum.jinswara.com — अनुमति सहित, साभार · shared with permission and thanks.

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